ये कहानी दक्षिण कोरिया के उस जेम्स बॉन्ड की है जिसने सबसे
पहले ये पता लगाया था कि उत्तर कोरिया ने दो परमाणु हथियार विकसित कर लिए
हैं.
दक्षिण कोरियाई सेना के अफ़सर और ख़ुफ़िया अभियानों को
अंजाम देने में माहिर पार्क चेइ सियो को उत्तर कोरिया के इन परमाणु
हथियारों का पता 1992 में लग गया था.
हालांकि ये परमाणु हथियार कम क्षमता वाले थे और उस वक्त पार्क चेइ सियो ने अमरीकी एजेंसी सीआईए के साथ मिलकर काम किया था.
दक्षिण कोरियाई सेना का ये ख़ुफ़िया मिशन अपने पड़ोसी देश की परमाणु क्षमता के बारे में सुराग जुटाना था.
पार्क चेइ सियो और दूसरे ख़ुफ़िया अफ़सर इस मिशन पर साल 1990 से ही काम कर रहे थे.
इसके साल भर पहले ही उत्तर कोरिया के योंगब्यॉन कॉम्प्लेक्स में एक
परमाणु संयंत्र की सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें पहली बार सामने आई थीं.
पार्क
ने इसके लिए न्यूक्लियर एनर्जी के प्रोफ़ेसर से संपर्क साधा. उत्तर कोरिया
के परमाणु कार्यक्रम की जानकारी देने के लिए पार्क ने इन प्रोफ़ेसर को
मनाया.
इस तरह से उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों की जानकारी हासिल
करने में पार्क कामयाब रहे और दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी नेशनल
इंटेलीजेंस सर्विस उनकी प्रतिभा की कायल हो गई.
साल 1995 में उत्तर कोरिया में घुसपैठ कर जासूसी करने के लिए पार्क चेइ सियो को ख़ास तौर पर चुना गया.
चीन की राजधानी बीजिंग में पार्क ने खुद को मिलिट्री कमांडर से बिजनेसमैन बने शख़्स के तौर पर पेश किया.
बीबीसी को हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में पार्क ने बताया, "इस मिशन का मक़सद दुश्मन के दिल तक पहुंचाना था."
"मैं
वहां तक पहुंचने में कामयाब रहा, जहां तक कोई दक्षिण कोरियाई जासूस कभी
नहीं पहुंच पाया था. मैं किम जोंग उन के पिता किम जोंग इल से भी मिला."
उत्तर
कोरिया में दाखिल होते वक्त कैसा महसूस होता था? इस सवाल पर पार्क बताते
हैं, "जब भी आप उत्तर कोरिया में दाखिल होते हैं, आप का सब कुछ दांव पर
होता है."
"आप कभी भी बेनकाब हो सकते हैं और आपका सिर किसी वक्त कलम किया जा सकता है."
पार्क
पर बनी फिल्म 'द स्पाई गोन नॉर्थ' को केन्स फिल्म फेस्टिवल में इसी मई में
सम्मानित किया गया और अगस्त में दक्षिण कोरिया के सिनेमाघरों में रिलीज़
हुई है.द स्पाई गोन नॉर्थ' का प्रीमियर भी ऐसे वक्त में हुआ जब उत्तर कोरिया का
परमाणु संकट एक नए दौर में दाखिल हो रहा था और जून के महीने में अमरीकी
राष्ट्रपति ट्रंप और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन सिंगापुर में मिल
रहे थे.
इस मुलाकात में किम जोंग उन ने उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम बंद करने की बात कही थी.
लेकिन
पार्क चेइ सियो कहते हैं, "उत्तर कोरिया के बारे में कोई जानकारी जुटाने
के लिए सबसे पहले तो वहां आने-जाने की आज़ादी होनी चाहिए."
"सबसे पहले तो उत्तर कोरिया से इसी आज़ादी की गारंटी मांगी जानी चाहिए."
पार्क
ने बताया कि उन्हें खुद को ऐसे आला दर्जे के शख़्स के तौर पर स्थापित करना
पड़ा जिससे उत्तर कोरिया की सरकार के बड़े अधिकारी मिलना चाहें.
दक्षिण कोरिया के तत्कालीन राष्ट्रपति किम योंग साम के करीबी लोगों से उन्हें इस सिलसिले में मदद मिली.
और
पार्क उनके जरिए उत्तर कोरिया के पावर सर्किल के रसूखदार जांग सेयोंग थाएक
के करीब आए. जांग सेयोंग थाएक किम जोंग-उन के चाचा भी थे. साल 2013 में
किम जोंग उन ने जांग सेयोंग थाएक की हत्या करवा दी.र्क बताते हैं कि किम जोंग इल के अलावा उत्तर कोरियाई निज़ाम के आला
अफसरों में जांग सेयोंग थाएक से उनकी मुलाकात हुई. ये दोनों बीजिंग अक्सर
जाया करते थे.
लेकिन किसी से मुलाकात कर लेना एक बात होती है और उसका भरोसा हासिल करना दूसरी बात.
"जब
उत्तर कोरियाई अधिकारी ये तय कर लेते हैं कि उन्हें किसी के साथ काम करना
है तो फिर उस शख़्स को इस कम्युनिस्ट देश के लिए वफादारी की शपथ लेनी पड़ती
है."
"आपसे एक दस्तावेज़ पर दस्तखत कराए जाते हैं लेकिन मैं उन्हें
इनकार करता रहा. मैंने उन्हें कहा कि ऐसा करने के लिए मुझे मजबूर मत करो."
"मैंने
उन्हें कहा कि मैं यहां सिर्फ़ बिज़नेस करने के लिए आया हूं. उन्होंने मेरी तरफ़ बंदूक तान दी थी लेकिन मैंने चांस लिया और उन पर चिल्लाने लगा."
'द
स्पाई गोन नॉर्थ' के एक अहम दृश्य में ये दिखाया गया है कि पार्क को किम
जोंग इल से मिलते हुए दिखाया गया है. फिल्म में किम जोंग इल अपने पालतू
कुत्ते के साथ गेस्ट रूम की तरफ़ बढ़ते हुए दिख रहे हैं.
पार्क बताते हैं कि हकीकत तो ये थी कि मेरी पूरी जांच पड़ताल खत्म होने के बाद ही मुझे किम जोंग इल के पास ले जाया गया था.
किम जोंग इल से मुलाकात के दौरान पार्क चेइ सियो ने खुद को एक दक्षिण
कोरियाई एडवर्टाइज़िंग कंपनी के अधिकारी के तौर पर पेश किया जो दोनों
कोरियाई देशों के लिए एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था.
उत्तर कोरिया
के अधिकारियों ने पार्क चेइ सियो को किम जोंग इल से इसलिए मिलवाया था ताकि
वो उन्हें एडवर्टाइजिंग का कॉन्सेप्ट समझा सकें और अपने प्रोजेक्ट के लिए मना सकें.
पार्क याद करते हैं, "एडवर्टाइजिंग को पूंजीवाद का गहना
माना जाता है लेकिन एक साम्यवादी देश को पब्लिसिटी का आइडिया कैसे बेचा जा
सकता था. ये आसान नहीं था. और अपने एडवर्टाइज़िंग कैम्पेन को आगे बढ़ाने के
लिए मुझे किम जोंग इल के सबसे उच्च स्तर से इजाजत लेनी थी."
पार्क ने बताया कि किम जोंग इल बेहद सौम्य और सलीकेदार शख्सियत थे. "वे पक्के
इरादे वाले शख्स थे जिसमें फैसले करने का माद्दा था. वे अपना कहा एक शब्द
भी नहीं दोहराते थे. उनकी बातें बिना किसी लाग लपेट के स्पष्ट होती थीं."
Monday, September 17, 2018
Friday, September 14, 2018
联合国呼吁立刻对气候变化采取行动
联合国气候变化框架公约执行秘书伊沃•德布尔警告称, 如果12月在印度尼西亚巴厘岛举行的国际气候会议上不达成协议,世界就会深陷“麻烦”之中。
德布尔说,在对抗气候变化方面,政府没有做好必要的准备工作。德布尔在石油输出国家组织峰会期间说,"目前从科学界所提供的信息,说明如果巴厘岛国际气候会议有任何差错,我们将有大的“麻烦”。
他补充道,不应该有石油战争。所有能源的应用须合理来符合经济发展和减少碳排放目标的要求。
中国国家环保总局一位负责人今天透露,12家重污染企业因为上了国家环保总局递交给银监会和人民银行的黑名单,已经被各家银行追缴、停止或拒绝贷款。
安徽的一家酿酒企业本来要向当地银行申请1000万元的贷款,但银行在上报时查询发现这家企业因为多年来没有污水处理设施、生产污水直接排放而上了环保部门的黑名单,于是迅速叫停了这笔贷款。国家环保总局负责人说,绿色信贷已经显现的作用是逼迫企业必须为环境违法行为承担经济损失。现行法律允许环保部门对污染企业罚款的额度只有10万元,这样的处罚与企业偷排结余的成本相比是杯水车薪,而绿色信贷在某种程度上丰富了环保部门的执法手段。
据介绍,目前绿色信贷已经是国际潮流,截至2006年11月,包括花旗、渣打、汇丰在内的至少43家大型跨国银行明确实行“赤道原则”,在贷款和项目资助中强调企业的环境和社会责任。世界银行、亚洲开发银行、美国和欧盟的进出口银行都已经把环境因素纳入贷款、投资和风险评估程序。
联合国的一研究报告说,欧洲可加大电子废物的回收,来改变从手机到冰柜等大多数废物被作为垃圾处理的现状。
负责该研究的 说,虽然欧洲经常被看作回收废物的好榜样,但还是有很大的改善空间。说,消费者不知道他们需退回电子废物,而且也不知道这些废物的环境影响。
欧洲制造了全球1/4的电子废物。
中国国家环保总局局长周生贤周三说,今年前3 个季度,中国化学需氧量排放比去年同期下降0.28%;二氧化硫排放量比去年同期下降1.81%。
至此,中国公布的两项学术性指标开始出现双双下降,出现拐点。周生贤说,煤电站安装了更多的脱硫设施石牌坊下降的一主要因素。
一全球电站排放数据库显示,澳大利亚人均电站二氧化碳排放为11吨,为全球最高。美国仅随其后, 为9吨。
虽然中国人均电站二氧化碳排放只有 2吨,但中国电站的二氧化碳排放将在未来10年上升60%。这一数据库,碳监控行动,收集了全球5万座电站的排放情况。
包括华能国际电力股份有限公司在内的4家中国电力公司,连同美国,德国,南非和印度的公司被列为全球碳排放最高的10家发电企业。
Wednesday, September 12, 2018
अगर पश्चिम बंगाल की बात करें तो वहां आपके वि
सवालः अगर पश्चिम बंगाल की बात करें तो वहां आपके विधायकों की संख्या 44 से 5 पर आ गई. वहां आपका जो कैडर है, गांव के गांव बीजेपी में शामिल हो रहे हैं, इसको कैसे रोकेंगे.
पश्चिम बंगाल में हमारे सामने बहुत ही गंभीर समस्या है. वहां हमारे 200 कॉमरेडों की हत्याएं हुई हैं. ये बिलकुल ग़लत ख़बर है कि गांव के गांव छोड़कर बीजेपी में जा रहे हैं. वहां पर लाखों वामपंथी लोग हैं जो कार्यरत हैं.
सवालः जब आपको दो तिहाई बहु
सवालः कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के बारे में एक ऐसी धारणा है कि वे जनता से सीधा कनेक्ट नहीं कर पाते, जनता की ज़ुबान में नहीं बोलते हैं. जिस तरह नरेंद्र मोदी, अरविंद केजरीवाल या मायावती बात करते हैं उसके मुक़ाबले आपका बात करने का तरीका सेमिनार सरीखा होता है. ऐसी आपकी आलोचना होती है. क्या इस पर कभी चर्चा होती है?
यह एक तरह का दुष्प्रचार है. कुछ दिन पहले दिल्ली में लाखों किसान मज़दूर आए हैं वो किससे प्रोत्साहित होकर आए हैं...
सवालः लेकिन यह समर्थन फिर वोट में तब्दील क्यों नहीं होता?
(हंसते हुए) यह सवाल तो पार्टी के अंदर भी सबसे बड़ा चर्चा का मुद्दा है. देश के अंदर वर्ग संघर्ष दो टांगों पर टिका हुआ है. एक है आपका आर्थिक शोषण दूसरा है सामाजिक शोषण. अब सिर्फ एक टांग को लेकर आर्थिक शोषण को लेकर आप दौड़ने की कोशिश करेंगे तो चल भी नहीं पाएंगे.
जब तक सामाजिक शोषण का जो संघर्ष है, उसे आर्थिक शोषण के संघर्षों के साथ नहीं जोड़ेंगे तो यही विरोधाभाष फ़िलहाल नज़र आता है.
पहले नारा होता था कि जिस भी फ़ैक्ट्री से धुंआ निकलता हुए दिखे तो उसके गेट पर लाल झंडा लहराना चाहिए. अब हमारा कहना है कि यह तो होना ही चाहिए, इसके साथ हर गांव में जिस कुएं से दलितों और पिछड़ों को पानी नहीं पीने देते, उस कुएं के ऊपर भी लाल झंडा नहीं लहराएगा, यह भरोसा नहीं आएगा.
इसी विरोधाभाष को हम भी समझने की कोशिश कर रहे हैं, लोग लाखों की संख्या में संघर्ष करने आते हैं, लाठी खाते हैं, जेल जाते हैं लेकिन जब वोट का समय आता है, तब अपनी सामाजिक समझ के आधार पर बंट जाते हैं.
सवालः पिछले चुनाव में बीजेपी को दलितों के वोट बैंक का 24 प्रतिशत वोट मिलाऔर दलित समाज कम्युनिस्ट पार्टियों को थोड़ा शक़ की निगाह से देखता है. कम्युनिस्ट पार्टियों में कितने दलित और दूसरी जातियों के लोग नेतृत्व करने वाले क़द तक पहुंच पाए?
ये आरोप ग़लत हैं. हालांकि अगर ऊपरी स्तर पर देखें तो दलितों का प्रतिनिधित्व जितना होना चाहिए उतना नहीं है. ये मैं भी मानता हूं, और इसको दुरुस्त करने की ज़रूरत है. वो हमारी प्राथमिकता भी है.
मत मिलता है पश्चिम बंगाल में, उस वक्त आपके मुख्यमंत्री ऑन रिकॉर्ड टेलीविज़न इंटरव्यू में कहते हैं, कैपिटलिज़्म इज़ द ओनली वे आउट( तो फिर ग़लती कहां हो गई?
इसके बारे में पार्टी ने भी उनकी आलोचना की. ये पार्टी की राय नहीं है. ज़रूर, एक पूंजीवादी व्यवस्था में देश है, और देश का एक हिस्सा बंगाल भी है.
लेकिन उसी पूंजीवादी व्यवस्था के विकल्प में वैकल्पिक नीतियां जो लागू की हैं, वहीं बंगाल में ख़ासियत रही. फिर चाहे भूमि-सुधार की बात हो, पंचायती राज की बात हो. ये सब बातों को छोड़कर सिर्फ़ पूंजीवाद ही एकमात्र समाधान और रास्ता है. इसकी आलोचना पार्टी ने की है.
सवालः भले ही आपको पसंद ना आए, लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी दलित पक्ष की पार्टी ये आपने अब कहना शुरू किया है. जब कन्हैया कुमार ने जेएनयू में 'लाल सलाम, जय भीम' कहना शुरू किया तब ये बातें आनी शुरू हुई. लेकिन सवाल यही है कि कम्युनिस्ट पार्टियों में दलितों का नेतृत्व कहां है?
कन्हैया कुमार से पहले भी यह नारा आ रहा था कि 'लाल झंडा-नीला झंडा, जय भीम लाल सलाम'...
सवालः यह तो कांशीराम के उद्भव के बाद की चीज़ है उससे पहले यह नहीं था.
बिलकुल, राजनीति के अंदर यह उसी समय उभर कर आई जब बहुजन समाज पार्टी उभर कर आई और कांशीराम जी ने उसे आगे बढ़ाया, यह बात बिलकुल ठीक है.
लेकिन दलित आंदोलन और वामपंथी आंदोलनों के बीच संबंध की बात आज की नहीं बल्कि बहुत पुरानी है. हां, वामपंथी और दलित नेताओं के बीच मतभेद भी हुए हैं. लेकिन यह कहना कि वामपंथी दलित विरोधी हैं, यह कहना ग़लत है.
सवालः दलित विरोधी नहीं, वामपंथी की छवि दलितपक्षीय नहीं हैं, जैसे बीएसपी सीधे-सीधे दलितों की बात करती है. अब बीजेपी ने भी कई दलित नेताओं के साथ संबंध बनाए और वो सरकार में भी हैं. जबकि आपकी पूरी रवायत से ही दलित ग़ायब हैं?
जो दलित संगठन हैं, जो दलितों की बात करते हैं, वो हमें भी अपने कार्यक्रमों में आमंत्रित करते हैं, यह बदलाव तो आ रहा है.
सवालः 1925 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया बनी थी और इसी साल राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ भी बना था. आरएसएस ने खुद को गांव-गांव तक पहुंचाया, तमाम संगठन हैं जो उनके तहत काम करते हैं. एक ज़माने में कम्युनिस्ट पार्टी के भी ऐसे कुछ सांस्कृतिक संगठन थे जैसे इप्टा था. आख़िर आप लोग कहां रास्ता भटक गए?
आरएसएस और उसका जो राजनीतिक अंग है बीजेपी, वो तभी बहुत ज़्यादा प्रभावी दिखते हैं जब सत्ता में होते हैं. जब ये सत्ता में नहीं होते हैं, जैसे जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं थे और गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने कहा था कि आरएसएस का सबसे बड़ा संगठन केरल में है, वहां आप देखिए क्या हाल हो रहा है राजनीति में. इस तरह की पार्टियों को सत्ता में रहने का फ़ायदा होता है.
सवालः यूपीए 1 की सरकार के वक्त आपकी पार्टी ने भारत-अमरीका के बीच हुए परमाणु समझौते के मुद्दे पर सरकार से खुद को हटा लिया था, उस फ़ैसले को आप आज कैसे देखते हैं.
यूपीए सरकार को हमने एक न्यूनतम कार्यक्रम के आधार पर समर्थन दिया था, ये मुद्दा उस कार्यक्रम का हिस्सा था ही नहीं. हालांकि बाद में हमारी पार्टी ने भी अपनी गलतियों और कमज़ोरियों को पहचाना. अब वो तो इतिहास का हिस्सा बन गया है.
लोगों को यह लगने लगा कि वामपंथी पार्टी के हटने की वजह से यूपीए सरकार कमज़ोर हो गई.
सवालः प्रकाश करात के नेतृत्व ने पार्टी को बहुत पीछे कर दिया, क्या कभी इस पर मंथन हुआ?
हमारी पार्टी में कभी एक व्यक्ति के ऊपर पूरी ग़लती की ज़िम्मेदारी नहीं डाली जाती. जो भी निर्णय होते हैं वह सामूहिक तौर पर लिए जाते हैं. जो भी निर्णय ग़लत होते हैं तो सामूहिक रूप से ही कहा जाता है कि यह ग़लत हो गया.
यूपीए 1 से समर्थन वापस लेने वाला ही उदाहरण है तो उसमें हमने पाया की सात जगह हमसे ग़लती हुई.
पश्चिम बंगाल में हमारे सामने बहुत ही गंभीर समस्या है. वहां हमारे 200 कॉमरेडों की हत्याएं हुई हैं. ये बिलकुल ग़लत ख़बर है कि गांव के गांव छोड़कर बीजेपी में जा रहे हैं. वहां पर लाखों वामपंथी लोग हैं जो कार्यरत हैं.
सवालः जब आपको दो तिहाई बहु
सवालः कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के बारे में एक ऐसी धारणा है कि वे जनता से सीधा कनेक्ट नहीं कर पाते, जनता की ज़ुबान में नहीं बोलते हैं. जिस तरह नरेंद्र मोदी, अरविंद केजरीवाल या मायावती बात करते हैं उसके मुक़ाबले आपका बात करने का तरीका सेमिनार सरीखा होता है. ऐसी आपकी आलोचना होती है. क्या इस पर कभी चर्चा होती है?
यह एक तरह का दुष्प्रचार है. कुछ दिन पहले दिल्ली में लाखों किसान मज़दूर आए हैं वो किससे प्रोत्साहित होकर आए हैं...
सवालः लेकिन यह समर्थन फिर वोट में तब्दील क्यों नहीं होता?
(हंसते हुए) यह सवाल तो पार्टी के अंदर भी सबसे बड़ा चर्चा का मुद्दा है. देश के अंदर वर्ग संघर्ष दो टांगों पर टिका हुआ है. एक है आपका आर्थिक शोषण दूसरा है सामाजिक शोषण. अब सिर्फ एक टांग को लेकर आर्थिक शोषण को लेकर आप दौड़ने की कोशिश करेंगे तो चल भी नहीं पाएंगे.
जब तक सामाजिक शोषण का जो संघर्ष है, उसे आर्थिक शोषण के संघर्षों के साथ नहीं जोड़ेंगे तो यही विरोधाभाष फ़िलहाल नज़र आता है.
पहले नारा होता था कि जिस भी फ़ैक्ट्री से धुंआ निकलता हुए दिखे तो उसके गेट पर लाल झंडा लहराना चाहिए. अब हमारा कहना है कि यह तो होना ही चाहिए, इसके साथ हर गांव में जिस कुएं से दलितों और पिछड़ों को पानी नहीं पीने देते, उस कुएं के ऊपर भी लाल झंडा नहीं लहराएगा, यह भरोसा नहीं आएगा.
इसी विरोधाभाष को हम भी समझने की कोशिश कर रहे हैं, लोग लाखों की संख्या में संघर्ष करने आते हैं, लाठी खाते हैं, जेल जाते हैं लेकिन जब वोट का समय आता है, तब अपनी सामाजिक समझ के आधार पर बंट जाते हैं.
सवालः पिछले चुनाव में बीजेपी को दलितों के वोट बैंक का 24 प्रतिशत वोट मिलाऔर दलित समाज कम्युनिस्ट पार्टियों को थोड़ा शक़ की निगाह से देखता है. कम्युनिस्ट पार्टियों में कितने दलित और दूसरी जातियों के लोग नेतृत्व करने वाले क़द तक पहुंच पाए?
ये आरोप ग़लत हैं. हालांकि अगर ऊपरी स्तर पर देखें तो दलितों का प्रतिनिधित्व जितना होना चाहिए उतना नहीं है. ये मैं भी मानता हूं, और इसको दुरुस्त करने की ज़रूरत है. वो हमारी प्राथमिकता भी है.
मत मिलता है पश्चिम बंगाल में, उस वक्त आपके मुख्यमंत्री ऑन रिकॉर्ड टेलीविज़न इंटरव्यू में कहते हैं, कैपिटलिज़्म इज़ द ओनली वे आउट( तो फिर ग़लती कहां हो गई?
इसके बारे में पार्टी ने भी उनकी आलोचना की. ये पार्टी की राय नहीं है. ज़रूर, एक पूंजीवादी व्यवस्था में देश है, और देश का एक हिस्सा बंगाल भी है.
लेकिन उसी पूंजीवादी व्यवस्था के विकल्प में वैकल्पिक नीतियां जो लागू की हैं, वहीं बंगाल में ख़ासियत रही. फिर चाहे भूमि-सुधार की बात हो, पंचायती राज की बात हो. ये सब बातों को छोड़कर सिर्फ़ पूंजीवाद ही एकमात्र समाधान और रास्ता है. इसकी आलोचना पार्टी ने की है.
सवालः भले ही आपको पसंद ना आए, लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी दलित पक्ष की पार्टी ये आपने अब कहना शुरू किया है. जब कन्हैया कुमार ने जेएनयू में 'लाल सलाम, जय भीम' कहना शुरू किया तब ये बातें आनी शुरू हुई. लेकिन सवाल यही है कि कम्युनिस्ट पार्टियों में दलितों का नेतृत्व कहां है?
कन्हैया कुमार से पहले भी यह नारा आ रहा था कि 'लाल झंडा-नीला झंडा, जय भीम लाल सलाम'...
सवालः यह तो कांशीराम के उद्भव के बाद की चीज़ है उससे पहले यह नहीं था.
बिलकुल, राजनीति के अंदर यह उसी समय उभर कर आई जब बहुजन समाज पार्टी उभर कर आई और कांशीराम जी ने उसे आगे बढ़ाया, यह बात बिलकुल ठीक है.
लेकिन दलित आंदोलन और वामपंथी आंदोलनों के बीच संबंध की बात आज की नहीं बल्कि बहुत पुरानी है. हां, वामपंथी और दलित नेताओं के बीच मतभेद भी हुए हैं. लेकिन यह कहना कि वामपंथी दलित विरोधी हैं, यह कहना ग़लत है.
सवालः दलित विरोधी नहीं, वामपंथी की छवि दलितपक्षीय नहीं हैं, जैसे बीएसपी सीधे-सीधे दलितों की बात करती है. अब बीजेपी ने भी कई दलित नेताओं के साथ संबंध बनाए और वो सरकार में भी हैं. जबकि आपकी पूरी रवायत से ही दलित ग़ायब हैं?
जो दलित संगठन हैं, जो दलितों की बात करते हैं, वो हमें भी अपने कार्यक्रमों में आमंत्रित करते हैं, यह बदलाव तो आ रहा है.
सवालः 1925 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया बनी थी और इसी साल राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ भी बना था. आरएसएस ने खुद को गांव-गांव तक पहुंचाया, तमाम संगठन हैं जो उनके तहत काम करते हैं. एक ज़माने में कम्युनिस्ट पार्टी के भी ऐसे कुछ सांस्कृतिक संगठन थे जैसे इप्टा था. आख़िर आप लोग कहां रास्ता भटक गए?
आरएसएस और उसका जो राजनीतिक अंग है बीजेपी, वो तभी बहुत ज़्यादा प्रभावी दिखते हैं जब सत्ता में होते हैं. जब ये सत्ता में नहीं होते हैं, जैसे जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं थे और गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने कहा था कि आरएसएस का सबसे बड़ा संगठन केरल में है, वहां आप देखिए क्या हाल हो रहा है राजनीति में. इस तरह की पार्टियों को सत्ता में रहने का फ़ायदा होता है.
सवालः यूपीए 1 की सरकार के वक्त आपकी पार्टी ने भारत-अमरीका के बीच हुए परमाणु समझौते के मुद्दे पर सरकार से खुद को हटा लिया था, उस फ़ैसले को आप आज कैसे देखते हैं.
यूपीए सरकार को हमने एक न्यूनतम कार्यक्रम के आधार पर समर्थन दिया था, ये मुद्दा उस कार्यक्रम का हिस्सा था ही नहीं. हालांकि बाद में हमारी पार्टी ने भी अपनी गलतियों और कमज़ोरियों को पहचाना. अब वो तो इतिहास का हिस्सा बन गया है.
लोगों को यह लगने लगा कि वामपंथी पार्टी के हटने की वजह से यूपीए सरकार कमज़ोर हो गई.
सवालः प्रकाश करात के नेतृत्व ने पार्टी को बहुत पीछे कर दिया, क्या कभी इस पर मंथन हुआ?
हमारी पार्टी में कभी एक व्यक्ति के ऊपर पूरी ग़लती की ज़िम्मेदारी नहीं डाली जाती. जो भी निर्णय होते हैं वह सामूहिक तौर पर लिए जाते हैं. जो भी निर्णय ग़लत होते हैं तो सामूहिक रूप से ही कहा जाता है कि यह ग़लत हो गया.
यूपीए 1 से समर्थन वापस लेने वाला ही उदाहरण है तो उसमें हमने पाया की सात जगह हमसे ग़लती हुई.
Friday, August 31, 2018
拉达克:抽水马桶“冲”出来的环境问题
37岁的丹增多吉的记忆中,穿越拉达克首府列城的河水当年是可以直接饮用的。
“那样的场景现在仅仅存在于梦境了,”他感叹道。如今,大量涌入拉达克的游客不仅改变了当地人的观念,也改变了当地水的质量和供给。
1974年印度政府才开始允许外国游客进入这片位于喜马拉雅山区中、毗邻中国和巴基斯坦的偏远之地。自那以后游客数量飞速增长。列城旅游局助理总监迈哈伯布·阿里告诉“第三极”,列城当年接待的游客数量就接近20万。这一数字是当地常住人口数量的四倍。
猛增的人流改变了当地人的生活方式。当地主管农业事务的官员默罕默德·侯赛因说,旅游业的急剧发展致使当地一半以上的居民完全或部分放弃农业生产。
“当你发现身边有其他(赚钱)的机会时,你不可能完全无动于衷, 任何人都是这样。” 侯赛因说。
越来越多的居民开起了餐馆或者旅店。但多吉尔指出,旅游业的兴旺是有代价的。旅游业的发展侵蚀了拉达克的传统,而在这片天然环境原本恶劣的土地上,传统习俗曾经帮助人们与自然和谐共处。
“比如说,我们这里的居民以前都是用旱厕的。但现在旱厕越来越多地被抽水马桶取代。这完全是与自然背道而驰的,因为拉达克本来就是一个缺水的地方,”多吉告诉“第三极”。
几个世纪以来,拉达克的居民们使用的都是干厕便器。列城公共健康工程部执行工程师扎西顿珠说:“我是传统旱厕的支持者。旱厕虽然听起来不那么雅观,但却是最适合我们的。”这位高级官员家中使用的就是旱厕,他希望借此为这个水资源紧缺的地区树立一个榜样。
拉达克生态开发集团( )执行总监洛桑苏廷表示,旱厕还有其他好处。“旱厕里的粪便可以用来给庄稼施肥。最重要的是,即便在列城冬天最低气温达到零下40摄氏度的时候也可以很方便地使用。”非政府组织LEDeG呼吁人们使用有利于生态保护的旱厕 。
一些居民对此表示认同。家庭主妇德钦曲措称自己不准备用抽水马桶替代家里的旱厕 。“我们一直用着挺好的。不需要水,不会有什么异味,而且粪便还可以用来给农田施肥。”
苏廷警告说,拉达克很多地区的地下水位正在快速下降,列城周围尤其如此。“这将在近期带来严重的问题。这是一个危险的趋势,因为列城降水量微不足道,只有非常少的降雨和降雪。我们必须珍惜现有的地下水资源。”
列城及周边大多数河流都流淌的是冰川融水。居民反映说水流量日益减少。在所有的酒店、旅馆以及八成家庭都使用地下水资源的背景下,河流水量的减少意味着地下水位更加难以恢复。 近期对列城地下水使用情况进行了调查。初步结果显示,城内375家酒店每天开采使用地下水85.21万升。
所有这些事实都令多吉忧心不已。“人们采取的措施都与自然的规则不符,”他说。“应该禁止挖自流井等背离传统的行为,只有这样我们才能生存下去。”
“那样的场景现在仅仅存在于梦境了,”他感叹道。如今,大量涌入拉达克的游客不仅改变了当地人的观念,也改变了当地水的质量和供给。
1974年印度政府才开始允许外国游客进入这片位于喜马拉雅山区中、毗邻中国和巴基斯坦的偏远之地。自那以后游客数量飞速增长。列城旅游局助理总监迈哈伯布·阿里告诉“第三极”,列城当年接待的游客数量就接近20万。这一数字是当地常住人口数量的四倍。
猛增的人流改变了当地人的生活方式。当地主管农业事务的官员默罕默德·侯赛因说,旅游业的急剧发展致使当地一半以上的居民完全或部分放弃农业生产。
“当你发现身边有其他(赚钱)的机会时,你不可能完全无动于衷, 任何人都是这样。” 侯赛因说。
越来越多的居民开起了餐馆或者旅店。但多吉尔指出,旅游业的兴旺是有代价的。旅游业的发展侵蚀了拉达克的传统,而在这片天然环境原本恶劣的土地上,传统习俗曾经帮助人们与自然和谐共处。
“比如说,我们这里的居民以前都是用旱厕的。但现在旱厕越来越多地被抽水马桶取代。这完全是与自然背道而驰的,因为拉达克本来就是一个缺水的地方,”多吉告诉“第三极”。
几个世纪以来,拉达克的居民们使用的都是干厕便器。列城公共健康工程部执行工程师扎西顿珠说:“我是传统旱厕的支持者。旱厕虽然听起来不那么雅观,但却是最适合我们的。”这位高级官员家中使用的就是旱厕,他希望借此为这个水资源紧缺的地区树立一个榜样。
拉达克生态开发集团( )执行总监洛桑苏廷表示,旱厕还有其他好处。“旱厕里的粪便可以用来给庄稼施肥。最重要的是,即便在列城冬天最低气温达到零下40摄氏度的时候也可以很方便地使用。”非政府组织LEDeG呼吁人们使用有利于生态保护的旱厕 。
一些居民对此表示认同。家庭主妇德钦曲措称自己不准备用抽水马桶替代家里的旱厕 。“我们一直用着挺好的。不需要水,不会有什么异味,而且粪便还可以用来给农田施肥。”
苏廷警告说,拉达克很多地区的地下水位正在快速下降,列城周围尤其如此。“这将在近期带来严重的问题。这是一个危险的趋势,因为列城降水量微不足道,只有非常少的降雨和降雪。我们必须珍惜现有的地下水资源。”
列城及周边大多数河流都流淌的是冰川融水。居民反映说水流量日益减少。在所有的酒店、旅馆以及八成家庭都使用地下水资源的背景下,河流水量的减少意味着地下水位更加难以恢复。 近期对列城地下水使用情况进行了调查。初步结果显示,城内375家酒店每天开采使用地下水85.21万升。
所有这些事实都令多吉忧心不已。“人们采取的措施都与自然的规则不符,”他说。“应该禁止挖自流井等背离传统的行为,只有这样我们才能生存下去。”
Wednesday, August 29, 2018
阿斯伽迪亚:首个太空社区面临的难题
迄今为止,我是两个国家的正式国民。一个是人口3.25亿,面积近1000万平方公里的美国。另一个是阿斯伽迪亚( )国。成立于2017年11月的阿斯迪伽亚有大约24.6万国民,但目前其国土只是一个61磅重(2.7公斤),大小和面包箱相当的卫星,在近地轨道上漂浮着。
阿斯伽迪亚的宪法宣称,阿斯伽迪亚计划将来会建造一艘环绕地球运行的巨型“太空方舟”,并在月球乃至其他“天体”上建立殖民地。阿斯伽迪亚的“领袖”阿舒尔贝利( 并不是在开玩笑。他的简历显示,这位来自阿塞拜疆的亿万富翁涉足出版、电信、科学教育,以及太空威胁防御、纳米技术和航天研究咨询等多个商业领域。他还曾担任俄罗斯大型国有公司 的首席执行官。 是一家防务承包商,主要制造导弹系统和其他军事装备。离开该公司后,阿舒尔贝利转而在俄罗斯修建大教堂。
6月25日,阿舒尔贝利在奥地利维也纳就任阿斯伽迪亚首任“国家元首”。他的头像被印在阿斯伽迪亚的官方纪念币上。在就职典礼结束后的晚宴上,纪念币发放给了到场的宾客。
当晚的就职典礼在维也纳巴洛克风格的霍夫堡宫举行。典礼仪式上,乐队的演奏炒热了气氛,然后一个少女合唱团演唱了阿斯伽迪亚的新国歌。现场还播放了国际空间站的一名俄罗斯宇航员提前录制的祝贺词。随后,阿舒尔贝利发表演讲,宣布阿斯伽迪亚的崇高目标是“太空和平以及防止地球上的冲突转移至太空”。他戴着一条中世纪风格的项链,上面有一枚徽章。
然后,由国民、议员、捐款人、支持者、媒体和其他来宾组成的大约350名宾客被领进一个风格华丽的大厅,享用有三道菜的晚宴。国际著名的音乐家和舞蹈家为我们带来了精彩的表演,从经典歌剧、协奏曲、芭蕾舞,到弗拉明戈舞、日本民歌和一名穿着黑色长筒靴在舞台上踱着步的音乐家用红色电子小提琴演奏的施特劳斯名曲。组织者选择这些节目部分是为了表明阿斯伽迪亚有12种官方语言(英语为工作语言)。阿舒尔贝利后来告诉我,突出艺术的地位很重要,因为“武器让我们四分五裂,文化让我们团结一心”。
这一切似乎是十足的乌托邦式的,但阿斯伽迪亚打算如何超越人类在地球上有着漫长历史的冲突呢?
阿斯伽迪亚“ ”这个词来自“ ”(阿斯加德),指的是北欧神话故事中众神在古斯堪的纳维亚的居住地。阿舒尔贝利称阿斯伽迪亚是一个“王国”,但他的头衔并不是国王,而是“国家元首”。阿斯伽迪亚的宪法规定,国家元首任期5年,担任此职务者可连任,直至82岁。继任者由国家元首、太空理事会和议会提名。
晚宴过后,阿舒尔贝利站在桌旁,同排队等候与他交谈和自拍的每一个国民进行了简短交流。来自加拿大的阿斯伽迪亚国民布罗根(Mitchell Brogan),从事加密货币和区块链行业。他说,见到国家元首时他很紧张,但阿舒尔贝利让他放松了下来,甚至“允许我教他怎么碰拳祝贺”。
之后,阿舒尔贝利坐了下来,在一名俄英翻译的协助下接受媒体一对一的采访。轮到我时,我告诉他我也是一名阿斯伽迪亚国民。他一边用英语说“你好,阿斯伽迪亚人”,一边在脸上挤出了一个微笑。
身为阿塞拜疆贵族之后的阿舒尔贝利告诉我,他之所以称自己的新国家为“王国”部分原因是“我喜欢英国联合王国”,还有一部分原因是这个词有某种魔力。你不觉得这很浪漫吗?就像“天国”,是天堂里而不是地球上的一个王国。
阿舒尔贝利信奉基督教,但他已下令“在阿斯伽迪亚禁止”一切宗教和政党,以期避免地球上的宗教和政治冲突。尽管颁布了诸如此类的法令,但阿舒尔贝利说“阿斯伽迪亚完全是一个民主国家”。
但要是你看看阿斯伽迪亚的宪法,就会发现国家元首有权解散议会。法国医生萨吉特( Saget)是阿斯伽迪亚的146名议员之一。他向来对太空旅行和太空医学感兴趣。他说,“王国”这种国体起初的确让他感到困扰,但他相信君主立宪制的概念。这位曾申请成为欧盟宇航员的议员说,“重要的是有人定下正确的基调。”
阿斯伽迪亚的逾 24万6千国民来自世界各地。布克莱雷维奇( icz)生活在夏威夷,是一名护士,也是一名临终看护。她还是夏威夷希洛艾米洛天文中心( 的志愿者。她没有来维也纳躬逢其盛,但她在电子邮件中向我解释说,她成为阿斯伽迪亚公民是因为看到了“真的有机会从一份清白的蓝图开始,成立一个 '开放国家'的可能性”。
Monday, August 27, 2018
जिनकी नींद उड़ी रहती है उनका दिमाग़ ठीक नहीं होता
जक्के टैमिनेन के ऐसे बहुत से शागिर्द हैं जो आम छात्रों की तरह ही बर्ताव करते हैं. वो इम्तिहान से एक दिन पहले
सारी रात जाग कर पढ़ते हैं, ताकि जितना हो सके उतना चीज़ें याद कर लें.
मगर, किसी भी छात्र के लिए इससे ग़लत काम नहीं होता.
ये बात ख़ुद
टैमिनेन कहते हैं. टैमिनेन ब्रिटेन के रॉयल हॉलोवे यूनिवर्सिटी में
मनोविज्ञान के लेक्चरर हैं. वो छात्रों को चेतावनी देते हैं कि इम्तिहान से
एक रात पहले जागना उनके लिए बहुत नुक़सानदेह है.टैमिनेन को ये बात इसलिए पता है क्योंकि वो नींद के हमारे ज़हन पर पड़ने वाले असर के एक्सपर्ट हैं. वो ये अच्छी तरह से जानते-समझते हैं कि नींद हमारी याददाश्त पर और ज़बान को याद करने की ताक़त पर कैसा असर डालती है.
टैमिनेन कहते हैं कि सोते हुए टेप रिकॉर्डर पर किसी भाषा का ऑडियो सुनते हुए सोने पर वो भाषा याद हो जाएगी, ऐसा बिल्कुल नहीं है.
हां, नींद का हमारी ज्ञान बढ़ाने की कोशिश से गहरा ताल्लुक़ है. टैमिनेन ही नहीं तमाम और रिसर्चर्स के तजुर्बों से ये बात सामने आई है.
टैमिनेन अभी जो रिसर्च कर रहे हैं, उसमें शामिल होने वालों को पहले नए शब्द याद कराए जाते हैं. फिर उन्हें रात भर जगा कर रखा जाता है. टैमिनेन, इन लोगों की याददाश्त को पहले कुछ दिनों, फिर कुछ हफ़्तों बाद परखते हैं.
पता ये चला है कि शब्द याद करने के बाद सारी रात जागने वाले छात्र बाद के दिनों में चाहे जितना सो लें, उनके याद किए हुए शब्द दोबारा याद करने में दिक़्क़त होती है.
इन लोगों के मुक़ाबले, जो लोग शब्दों को याद करने के बाद रात में सो गए, उन्हें याद किए हुए लफ़्ज़ों को दोबारा याद करने में मशक़्क़त नहीं करनी पड़ी.
टैमिनेन कहते हैं कि, "नींद का हमारी सीखने की क्षमता से गहरा नाता है. भले ही आप सोते वक़्त कुछ पढ़ नहीं रह होते, लेकिन आप का दिमाग़ उस वक़्त भी पढ़ रहा होता है. सीख रहा होता है. वो आपके लिए रतजगा कर के पढ़ाई कर रहा होता है. अगर आप ठीक से नहीं सोते, तो भले ही आप कितनी कोशिशें कर लें, आप की याददाश्त कम ही रहनी है."
हम ने टैमिनेन की 'स्लीब लैब' में जाकर सोते हुए लोगों के ज़हन में झांकने की कोशिश की. इस लैब में बिस्तर के ऊपर छोटी सी ईईजी मशीन यानी इलेक्ट्रोएनसेफैलोग्राफी मशीन लगी होती है.
इस मशीन के ज़रिए सो रहे लोगों के दिमाग़ की गतिविधियों पर नज़र लखी जाती है. ये देखा जाता है कि सोते वक़्त दिमाग़ के अलग-अलग हिस्सों (फ्रॉन्टल, टेम्पोरल और पैरिएटल) में क्या हो रहा होता है. इसके अलावा ठोढ़ी और आंखों की हरकतों पर भी निगाह रखी जाती है.
लेकिन, फ़िलहाल तो टैमिनेन की रिसर्च के निशाने पर है, गहरी नींद का दौर. इसे वैज्ञानिक भाषा में 'स्लो वेव स्लीप' कहते हैं. ये यादें इकट्ठी करने और उन्हें सहेज कर रखने के लिए बहुत ज़रूरी होती है. इस दौरान, हमारे दिमाग़ का 'हिप्पोकैम्पस' हिस्सा दिमाग़ के दूसरे हिस्से 'नियोकॉर्टेक्स' के लगातार संपर्क में रहता है.
हिप्पोकैम्पस बहुत तेज़ी से चीज़ें सीखता है. वो रात में गहरी नींद के दौरान नियोकॉर्टेक्स को नई सीखी हुई जानकारियों को सहेजने में मदद करता है, ताकि ज़रूरत पड़ने पर उन्हें दोबारा से याद किया जा सके. तो, दिन में जो हिप्पोकैम्पस किसी जानकारी को जल्दी से सीखने में मदद करता है.
वही, हिप्पोकैम्पस रात में उस जानकारी को अच्छे से सहेजने का काम करता है. ये काम वो तभी करता है, जब आप गहरी नींद में होते हैं. फिर इस जानकारी को हिप्पोकैम्पस इसी तरह की दूसरी जानकारियों के साथ सहेज कर रखता है, ताकि वक़्त पड़ने पर दोनों के मेल से आप बेहतर नतीजे हासिल कर सकें.
किसी समस्या का हल खोजने में इस जानकारी की मदद ले सकें. इस काम में नियोकॉर्टेक्स की तंत्रिकाएं, हिप्पोकैम्पस की मददगार होती हैं. नियोकॉर्टेक्स और हिप्पोकैम्पस को जोड़ने वाली तंत्रिकाओं में नींद वाले तंतु होते हैं. ये तीन सेकंड की छोटी-छोटी खूंटियां होती हैं.
टैमिनेन बताते हैं कि इन तंतुओं की मदद से नई जानकारी का ज़हन में जमा पुरानी जानकारी से नाता तलाशा और जोड़ा जाता है.
तो, अगर आप ने दिन में कोई नया शब्द याद किया है. फिर रात में अच्छी नींद लेते हैं. तो इससे ये नए शब्द आप की पहले जमा शब्दावली में उन शब्दों के साथ जुड़ते हैं, जो नए याद किए गए लफ़्ज़ से नाता रखते हैं.
गहरी नींद में हमारी आंखें तेज़ फड़फड़ाती हैं. इसे आरईएम यानी रैपिड आई मूवमेंट कहते हैं. इसका नई भाषा सीखने की हमारी क्षमता से गहरा ताल्लुक़ है.
इस दौरान हम ख़्वाब देख रहे होते हैं. साथ ही नई भाषा से संबंध बना रहे होते हैं. कनाडा की राजधानी ओटावा की यूनिवर्सिटी में छात्रों पर हुई रिसर्च से ये बात साबित हो चुकी है.
Saturday, August 18, 2018
中国三记重拳打击可再生能源浪费
目前中国已经成为可再生能源行业的领跑者。短短五年,中国在该领域的投资就从390亿美元猛增至1110亿美元,太阳能发电能力增长了167倍,风能则翻了两番。可再生能源的实际利用率也在迅速增长,非化石燃料在一次能源消费中的占比从2010年的8.3%提高到2015年的12%,超过了11.4%的既定目标,也为中国兑现2020年可再生能源占比15%的哥本哈根承诺以及2030年20%的巴黎承诺打下了坚实的基础。
和其他国家一样,中国也面临着向低碳电力转型的各种挑战。主要问题之一就是“弃电”,指的是:即便风能和太阳能电厂可以生产电力,电网也无法将其并入。2015上半年,中国将近10%的太阳能发电能力未被利用,而全年被浪费的风力发电则高达15%。在甘肃、宁夏、黑龙江、新疆和云南等省份,这种情况更加严重。
中国的《可再生能源法》禁止“弃风弃光”,但问题依旧,部分在于技术原因。但是,绝大部分原因并非技术性的。在实践中,化石燃料发电厂比可再生能源有优先权,在中国这样一个燃煤发电产能大量过剩的国家,给太阳能和风能留下的空间就更小了。另外,可再生能源布局整合如何落实也缺乏明确安排。因此,中国可再生能源的健康发展必须更好地制定和落实政策。
三记重拳
为了解决这一问题,中国政府在过去两个月中连续打出了三记“组合拳”。
第一记:紧急叫停新燃煤电厂建设
据媒体报道,中央政府已经下令13个省份暂缓核准自用煤电项目,15省缓建已经批准的项目。政府还制定了一个煤电建设风险预警机制,预测并阻止地方政府作出让未来煤电过剩恶化的决策。根据未来三年的预警信号,28个省级电网区域的预警状态为预警程度最严峻的“红色”,这要求地方政府暂停批准项目,企业也要重新考虑投资。中国政府此举的目的是通过遏制占主导地位煤电的进一步扩张,防止煤电与可再生能源发生破坏性的竞争。
第二记:通过“管理办法”保证上网可再生能源电力的销售
三月份出台的《可再生能源发电全额保障性收购管理办法》(简称《办法》)为风电和可利用规模的太阳能发电设置了保障性收购年利用小时数,以保证这些项目的成本回收并取得合理的利润。办法中首次提出,如果化石燃料发电挤占了可再生能源的保障性收购份额,就要对其作出补偿,这样一来,化石燃料所挤占的这部分市场的发电成本就会提高。在保障性收购之外,《办法》也鼓励可再生能源以具有竞争力的价格参与电力市场。由于可再生能源的边际成本较低,这一举措可以进一步扩大可再生能源发电的规模。另外,《办法》对于其他可再生能源形式,如生物质能、地热能、海洋能和分布式太阳能发电等,也都规定了保障性收购。
《办法》还明确了中央和地方管理者、化石燃料与可再生能源发电厂,以及电网公司的角色和责任,为切实执行提供了必需的清晰界定。
《办法》的出台,使中国向着绿色电力调度系统的建立迈出了坚实的一步。所谓“绿色电力调度系统”,就是对可再生、高效、低碳的能源进行优先调度,这也是习近平主席在2015年9月的《中美元首气候变化联合声明》中呼吁建立的。
第三记:制定可再生能源消费和发电目标
中央政府还发布了“国家能源局关于建立可再生能源开发利用目标引导制度的指导意见”(简称“指导意见”),为非水电可再生能源(太阳能、风能、生物质能、地热能、波浪能和潮汐能等)发电制定了最低消费目标。如今已经有31个省份定下了2020年的消费目标,从5%到13%不等,将大大激励地方政府对可再生能源进行整合。
与此同时,“指导意见”还要求电力企业到2020年要实现非水力可再生能源发电在总发电量中至少占比9%,也就是说差不多要在五年内翻一番。它还明确了设立绿色电力证书交易机制的目标,在该机制下,电力企业可以出售或购进可再生能源,通过这种方式来满足上面提到的要求。
数据来源:2010-2014年数据来自中国电力企业联合会;2015年数据来自国家统计局《2015年国民经济和社会发展统计公报》;2020年要求量来自国家能源局。
和其他国家一样,中国也面临着向低碳电力转型的各种挑战。主要问题之一就是“弃电”,指的是:即便风能和太阳能电厂可以生产电力,电网也无法将其并入。2015上半年,中国将近10%的太阳能发电能力未被利用,而全年被浪费的风力发电则高达15%。在甘肃、宁夏、黑龙江、新疆和云南等省份,这种情况更加严重。
中国的《可再生能源法》禁止“弃风弃光”,但问题依旧,部分在于技术原因。但是,绝大部分原因并非技术性的。在实践中,化石燃料发电厂比可再生能源有优先权,在中国这样一个燃煤发电产能大量过剩的国家,给太阳能和风能留下的空间就更小了。另外,可再生能源布局整合如何落实也缺乏明确安排。因此,中国可再生能源的健康发展必须更好地制定和落实政策。
三记重拳
为了解决这一问题,中国政府在过去两个月中连续打出了三记“组合拳”。
第一记:紧急叫停新燃煤电厂建设
据媒体报道,中央政府已经下令13个省份暂缓核准自用煤电项目,15省缓建已经批准的项目。政府还制定了一个煤电建设风险预警机制,预测并阻止地方政府作出让未来煤电过剩恶化的决策。根据未来三年的预警信号,28个省级电网区域的预警状态为预警程度最严峻的“红色”,这要求地方政府暂停批准项目,企业也要重新考虑投资。中国政府此举的目的是通过遏制占主导地位煤电的进一步扩张,防止煤电与可再生能源发生破坏性的竞争。
第二记:通过“管理办法”保证上网可再生能源电力的销售
三月份出台的《可再生能源发电全额保障性收购管理办法》(简称《办法》)为风电和可利用规模的太阳能发电设置了保障性收购年利用小时数,以保证这些项目的成本回收并取得合理的利润。办法中首次提出,如果化石燃料发电挤占了可再生能源的保障性收购份额,就要对其作出补偿,这样一来,化石燃料所挤占的这部分市场的发电成本就会提高。在保障性收购之外,《办法》也鼓励可再生能源以具有竞争力的价格参与电力市场。由于可再生能源的边际成本较低,这一举措可以进一步扩大可再生能源发电的规模。另外,《办法》对于其他可再生能源形式,如生物质能、地热能、海洋能和分布式太阳能发电等,也都规定了保障性收购。
《办法》还明确了中央和地方管理者、化石燃料与可再生能源发电厂,以及电网公司的角色和责任,为切实执行提供了必需的清晰界定。
《办法》的出台,使中国向着绿色电力调度系统的建立迈出了坚实的一步。所谓“绿色电力调度系统”,就是对可再生、高效、低碳的能源进行优先调度,这也是习近平主席在2015年9月的《中美元首气候变化联合声明》中呼吁建立的。
第三记:制定可再生能源消费和发电目标
中央政府还发布了“国家能源局关于建立可再生能源开发利用目标引导制度的指导意见”(简称“指导意见”),为非水电可再生能源(太阳能、风能、生物质能、地热能、波浪能和潮汐能等)发电制定了最低消费目标。如今已经有31个省份定下了2020年的消费目标,从5%到13%不等,将大大激励地方政府对可再生能源进行整合。
与此同时,“指导意见”还要求电力企业到2020年要实现非水力可再生能源发电在总发电量中至少占比9%,也就是说差不多要在五年内翻一番。它还明确了设立绿色电力证书交易机制的目标,在该机制下,电力企业可以出售或购进可再生能源,通过这种方式来满足上面提到的要求。
数据来源:2010-2014年数据来自中国电力企业联合会;2015年数据来自国家统计局《2015年国民经济和社会发展统计公报》;2020年要求量来自国家能源局。
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